
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड का मत्स्य पालन (मछली पालन) क्षेत्र आज कामयाबी की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। राज्य के इतिहास में पहली बार ‘रेनबो ट्राउट’ मछली का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात किया गया है, जिसे इस क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
पिथौरागढ़ से नेपाल तक का सफर: स्थानीय पालकों को सीधा फायदा
सीमांत जिले पिथौरागढ़ की तीन सहकारी समितियों ने मिलकर कड़ी मेहनत से पांच मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली तैयार की, जिसे नेपाल भेजा गया है। इस अंतरराष्ट्रीय निर्यात से स्थानीय मत्स्य पालकों को सीधा आर्थिक लाभ मिला है। इस बड़ी कामयाबी को उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य फोकस इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और उत्पादन को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि आधुनिक कोल्ड-चेन, बेहतर पैकेजिंग और सीधे बाजार से जुड़ाव (मार्केट लिंकिंग) जैसी सुविधाओं के दम पर ही यह ऐतिहासिक सफलता मुमकिन हो पाई है।
आईटीबीपी (ITBP) के साथ मजबूत साझेदारी
पहाड़ के विकास को रफ्तार देने के लिए साल 2024 में आईटीबीपी के साथ एक खास एमओयू (MoU) किया गया था। इस समझौते के तहत अब तक 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है, जिसकी कुल कीमत 2.10 करोड़ रुपये है। यह साझेदारी स्थानीय उत्पादन को देश की सुरक्षा में लगे जवानों की थाली तक पहुंचा रही है।
रोजगार का बड़ा जरिया बना मत्स्य पालन (आंकड़ों में तरक्की)
उत्तराखंड सरकार के निरंतर प्रयासों और प्रोत्साहित करने वाली नीतियों के चलते इस क्षेत्र से जुड़ने वाले लोगों की संख्या में भारी उछाल आया है। यह आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं:
वर्ष 2022 में मत्स्य पालकों की संख्या: 10,011
वर्तमान में मत्स्य पालकों की संख्या: बढ़कर 15,657 हो गई है।
साफ है कि कभी पारंपरिक आजीविका तक सीमित रहने वाला यह क्षेत्र आज धामी सरकार की दूरदर्शी नीतियों की बदौलत राज्य के हजारों परिवारों की आर्थिक मजबूती और सुनहरे भविष्य का जरिया बन चुका है।



